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शिशॠको दूध पीने के बाद कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ होती है उलà¥â€à¤Ÿà¥€, जानिठकारण और घरेलू नà¥à¤¸à¥â€à¤–े
अकà¥â€à¤¸à¤° दूध पीने के बाद शिशॠउलà¥â€à¤Ÿà¥€ कर देते हैं। इसके कई कारण होते हैं जिनका पता लगाकर शिशॠको इस परेशानी से बचाया जा सकता है।
ulti hone ke gharelu upay
कई बार शिशॠपेट दरà¥à¤¦ या गैस की वजह रोता है लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ à¤à¥€ हो जाती है। वहीं अगर बार-बार उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो रही है तो इसका कारण जानकर इलाज करना जरूरी है ताकि शिशॠको जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिकà¥â€à¤•त न हो। इसकी वजह से शिशॠके शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
आइठजानते हैं कि शिशॠको किन कारणों से उलà¥â€à¤Ÿà¥€ होती है।
शिशॠकी à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली पूरी तरह मैचà¥â€à¤¯à¥‹à¤° नहीं होती है इसलिठदूध पीने के बाद दूध वापस à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली में आ सकता है जिससे शिशॠमà¥à¤‚ह या नाक से दूध बाहर निकाल देता है। शिशॠके 18 महीने के होने पर अकà¥â€à¤¸à¤° यह समसà¥â€à¤¯à¤¾ ठीक हो जाती है।
शिशॠकी सरसों के तेल से करेंगी मालिश तो हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होंगी मजबूत, जान लें मालिश का तरीका
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सरसों का तेल रकà¥â€à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को बेहतर करता है और शिशॠकी संपूरà¥à¤£ सेहत में सà¥à¤§à¤¾à¤° लाता है। शिशॠकी रोज मालिश करने से शरीर सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ और मजबूत बनता है। इसके अलावा शरीर में गरमाई रखने में सरसों का तेल बहà¥à¤¤ मदद करता है। यही वजह है कि ठंड के मौसम और ठंडे इलाकों में शिशॠको गरम रखने के लिठसरसों के तेल का ही इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
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लहसà¥à¤¨ की कà¥à¤› कलियां लें और उसे सरसों के तेल में डालकर हलà¥â€à¤•ा गरà¥à¤® कर लें। अब तेल के थोड़ा ठंडा होने पर शिशॠकी छाती पर लगाà¤à¤‚। इस तरह शिशॠमें खांसी और जà¥à¤•ाम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसमें आप लहसà¥à¤¨ की जगह तà¥à¤²à¤¸à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ डाल सकते हैं।
सरसों के तेल में à¤à¤‚टीफंगल और à¤à¤‚टीबैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं। इससे मालिश करने पर बचà¥â€à¤šà¥‡ को तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ मिलती है। सरसों का तेल शिशॠको कई तरह के सà¥à¤•िन इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ से बचाने में मदद करता है।
शिशॠके बालों की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठसरसों का तेल बहà¥à¤¤ असरकारी होता है। रोज बालों और सिर की इस तेल से मालिश करने से बालों की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ अचà¥â€à¤›à¥€ होती है।
सरसों का तेल बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को मचà¥â€à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से à¤à¥€ बचाता है। इस तेल की तेज गंध शिशॠको मचà¥â€à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से दूर रखती है।
सरसों के तेल में कई à¤à¤‚टीबैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ मौजूद हैं और यही वजह है कि इस तेल की मालिश से बचà¥â€à¤šà¥‡ की सà¥à¤•िन सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रहती है और तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ पर किसी तरह का कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ नहीं होता है।
शिशॠको अकà¥â€à¤¸à¤° फंगल इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ हो जाता है जाे कि बहà¥à¤¤ परेशानी पैदा करता है। अगर आप अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ की सरसों के तेल से मालिश करते हैं तो फंगल इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
आप शिशॠको इस तेल का जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लाठदिलाने के लिठनिमà¥â€à¤¨ तरीकों से पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकते हैं।
पहले तेल को उबाल लें और फिर उसे ठंडा कर के à¤à¤• बोतल में à¤à¤° लें। नहाने से पहले रोज इस तेल से शिशॠके सिर और शरीर की मसाज करें।आप चाहें तो इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से कà¥à¤› मिनट पहले आवशà¥â€à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° तेल गरà¥à¤® कर के à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकती हैं।सरसों के तेल में अजवाइन उबालकर उसे ठंडा होने दें। अब इसे तेल से शिशॠकी मालिश करें।आप सरसों के तेल में लहसà¥à¤¨ की कलियां या तà¥à¤²à¤¸à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ डालकर à¤à¥€ गरà¥à¤® करके इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं।
शिशॠके उलà¥â€à¤Ÿà¥€ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ होती है
सà¥â€à¤Ÿà¤®à¤• फà¥à¤²à¥‚ को वारयल गैसà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¥€ कहते हैं। यह पेट का à¤à¤• वायरल इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ होता है। इसमें उलà¥â€à¤Ÿà¥€, दसà¥â€à¤¤, बà¥à¤–ार और पेट में दरà¥à¤¦ जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं। पेट में फà¥à¤²à¥‚ होने पर कà¥à¤› दिनों तक शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो सकती है। उलà¥â€à¤Ÿà¥€ और दसà¥â€à¤¤ की समसà¥â€à¤¯à¤¾ गैसà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤‚टेसà¥â€à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨à¤² या किसी तंतà¥à¤° में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है। शिशॠके उलà¥â€à¤Ÿà¥€ करने का कारण मूतà¥à¤° मारà¥à¤— में संकà¥à¤°à¤®à¤£ और छाती में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी कमजोर होती है इसलिठउनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जलà¥â€à¤¦à¥€ जलà¥â€à¤¦à¥€ इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ होता रहता है।
शिशॠका उलà¥â€à¤Ÿà¥€ करना आम बात है?
जी हां, मां का दूध पीने के बाद शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ होना सामानà¥â€à¤¯ बात है। कई बार जब शिशॠको पेट à¤à¤° जाता है और वो जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पी लेता है तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो जाती है। शिशॠके बढ़ने पर यह समसà¥â€à¤¯à¤¾ अपने आप ठीक हो जाती है।
शिशॠकी सरसों के तेल से करेंगी मालिश तो हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होंगी मजबूत, जान लें मालिश का तरीका
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सरसों का तेल रकà¥â€à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को बेहतर करता है और शिशॠकी संपूरà¥à¤£ सेहत में सà¥à¤§à¤¾à¤° लाता है। शिशॠकी रोज मालिश करने से शरीर सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ और मजबूत बनता है। इसके अलावा शरीर में गरमाई रखने में सरसों का तेल बहà¥à¤¤ मदद करता है। यही वजह है कि ठंड के मौसम और ठंडे इलाकों में शिशॠको गरम रखने के लिठसरसों के तेल का ही इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
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लहसà¥à¤¨ की कà¥à¤› कलियां लें और उसे सरसों के तेल में डालकर हलà¥â€à¤•ा गरà¥à¤® कर लें। अब तेल के थोड़ा ठंडा होने पर शिशॠकी छाती पर लगाà¤à¤‚। इस तरह शिशॠमें खांसी और जà¥à¤•ाम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसमें आप लहसà¥à¤¨ की जगह तà¥à¤²à¤¸à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ डाल सकते हैं।
सरसों के तेल में à¤à¤‚टीफंगल और à¤à¤‚टीबैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं। इससे मालिश करने पर बचà¥â€à¤šà¥‡ को तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ मिलती है। सरसों का तेल शिशॠको कई तरह के सà¥à¤•िन इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ से बचाने में मदद करता है।
शिशॠके बालों की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठसरसों का तेल बहà¥à¤¤ असरकारी होता है। रोज बालों और सिर की इस तेल से मालिश करने से बालों की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ अचà¥â€à¤›à¥€ होती है।
सरसों का तेल बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को मचà¥â€à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से à¤à¥€ बचाता है। इस तेल की तेज गंध शिशॠको मचà¥â€à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से दूर रखती है।
सरसों के तेल में कई à¤à¤‚टीबैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ मौजूद हैं और यही वजह है कि इस तेल की मालिश से बचà¥â€à¤šà¥‡ की सà¥à¤•िन सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रहती है और तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ पर किसी तरह का कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ नहीं होता है।
शिशॠको अकà¥â€à¤¸à¤° फंगल इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ हो जाता है जाे कि बहà¥à¤¤ परेशानी पैदा करता है। अगर आप अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ की सरसों के तेल से मालिश करते हैं तो फंगल इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
आप शिशॠको इस तेल का जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लाठदिलाने के लिठनिमà¥â€à¤¨ तरीकों से पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकते हैं।
पहले तेल को उबाल लें और फिर उसे ठंडा कर के à¤à¤• बोतल में à¤à¤° लें। नहाने से पहले रोज इस तेल से शिशॠके सिर और शरीर की मसाज करें।आप चाहें तो इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से कà¥à¤› मिनट पहले आवशà¥â€à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° तेल गरà¥à¤® कर के à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकती हैं।सरसों के तेल में अजवाइन उबालकर उसे ठंडा होने दें। अब इसे तेल से शिशॠकी मालिश करें।आप सरसों के तेल में लहसà¥à¤¨ की कलियां या तà¥à¤²à¤¸à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ डालकर à¤à¥€ गरà¥à¤® करके इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं।
उलà¥â€à¤Ÿà¥€ रोकने के लिठकà¥â€à¤¯à¤¾ करें
जब à¤à¥€ शिशॠको दूध पिलाà¤à¤‚ तो अपने साथ साफ कपड़ा जरूर रखें ताकि जब à¤à¥€ शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो तà¤à¥€ तà¥à¤°à¤‚त उसका मà¥à¤‚ह साफ किया जा सके।
दूध पिलाने के बाद उसे हिलाà¤à¤‚ नहीं। रोज बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• ही समय पर दूध पिलाà¤à¤‚। रोज अलग समय पर दूध पिलाने पर समसà¥â€à¤¯à¤¾ और गंà¤à¥€à¤° हो सकती है। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° की सलाह पर ही उलà¥â€à¤Ÿà¥€ रोकने की दवा दें।
डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° को कब दिखाà¤à¤‚
यदि शिशॠको उलà¥â€à¤Ÿà¥€ और दसà¥â€à¤¤ हो रहे हैं तो उसके शरीर में पानी की कमी न होने दें। अगर उलà¥â€à¤Ÿà¥€ का रंग à¤à¥‚रा है या बचà¥â€à¤šà¥‡ को दसà¥â€à¤¤ नहीं है तो यह चिंता की बात है। आमतौर पर बचà¥â€à¤šà¥‡ को उलà¥â€à¤Ÿà¥€ 24 घंटे से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक नहीं होती है और अगर इससे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो तो यह किसी बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ या गंà¤à¥€à¤° बीमारी का संकेत हो सकता है। यदि बचà¥â€à¤šà¥‡ को उलà¥â€à¤Ÿà¥€ के बाद खांसी में खून आ रहा है तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚।
बेबी के लिठकेले से à¤à¤¸à¥‡ बनाà¤à¤‚ टेसà¥à¤Ÿà¥€ पà¥à¤¯à¥‚री
उलà¥â€à¤Ÿà¥€ रोकने के घरेलू नà¥à¤¸à¥â€à¤–े
सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने पर थोड़ी थोड़ी देर में शिशॠको दूध पिलाने की जरूरत होती है और उलà¥â€à¤Ÿà¥€ बंद होने पर आप शिशॠको रोज की तरह दूध पिलाना शà¥à¤°à¥‚ कर सकती हैं।
फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥â€à¤• लेने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को दो से तीन घंटे में हर पंदà¥à¤°à¤¹ मिनट में ओआरà¤à¤¸ की जरूरत पड़ती है। आपको केमिसà¥â€à¤Ÿ से ओआरà¤à¤¸ मिल जाà¤à¤—ा। इससे पानी की कमी नहीं होती है।
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